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पीस कमेटी की बैठक पीपीगंज थाने पर हुई संपन्न, होली और ईद के मद्देनजर शांति व्यवस्था की अपील

गोरखपुर/ जनपद के पीपीगंज थाने पर थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह की अध्यक्षता में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होली और ईद जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखना था। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने बैठक में उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने-अपने त्योहार को शांति और भाईचारे के साथ मनाएं ताकि समाज में सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहे।

थाना प्रभारी ने सभी से त्यौहारों के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन करने की अपील की और सभी धार्मिक, सामाजिक संगठन और समुदायों को एकजुट होकर शांति बनाए रखने का आग्रह किया।
इस बैठक में शांति व्यवस्था को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी प्रकार की अशांति या विवाद से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क रहेगा। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने विश्वास दिलाया कि पुलिस प्रशासन हर हाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्पर रहेगा और किसी भी प्रकार की हिंसा या नकारात्मक घटना को तुरंत काबू किया जाएगा।
बैठक में पीपीगंज कस्बा चौकी प्रभारी नितिन श्रीवास्तव उपनिरीक्षक, नगर पंचायत पीपीगंज के कालीचरण अग्रहरि नगर अध्यक्ष अग्रहरि समाज, सुभाषचंद्र अग्रहरि महामंत्री अग्रहरि समाज, सतीश कुमार प्रधान भरोहिया, गुड्डू यादव, आनंद भारती सभासद, राघवेंद्र सिंह मंटू सभासद, शनि जायसवाल सभासद, प्रहलाद गुप्ता पूर्व प्रधान और नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी भी मौजूद थे।
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गन्ने की एकल आंख विधि द्वारा उत्पादन पर होगा शोध – निदेशक डॉ. आर. विश्वनाथन

गोरखपुर/ महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, गोरखपुर में भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ के निदेशक डॉ. आर. विश्वनाथन के नेतृत्व में गन्ना उत्पादन की नई विधियों पर शोध का काम शुरू किया जाएगा। इस शोध के दौरान गन्ने की “एकल आंख विधि” के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। यह विधि गन्ने के उत्पादन को तीव्र गति से बढ़ाने और गन्ना पौधों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती है।

गोरखपुर के किसान अब गन्ने की खेती में रोगमुक्त पौधों का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे उनकी फसल में होने वाली बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस दौरान भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, गोरखपुर के निदेशक डॉ. आर. विश्वनाथन ने गन्ना उत्पादन की नई तकनीक “प्रो ट्रे तकनीक” को भी किसानों से साझा किया। यह तकनीक किसानों को अपने खेतों में बिना ज्यादा जगह के अधिक गन्ने की पौध तैयार करने में मदद करेगी।

नई तकनीकों का प्रदर्शन और गन्ना बीज शोधन यंत्र की कार्यशाला
गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख डॉ. आर. के. सिंह ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के निदेशक डॉ. आर. विश्वनाथन, प्रधान वैज्ञानिक कीट विज्ञान डॉ. अरुण बैठा, और वैज्ञानिक पादप रोग डॉ. चंद्रमणि राज के साथ केंद्र का भ्रमण किया। इस दौरान उपकार प्रोजेक्ट के तहत गन्ना बीज शोधन यंत्र और गन्ना कटाई यंत्र का भी प्रदर्शन किया गया।

इन यंत्रों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. अरुण बैठा और डॉ. चंद्रमणि राज ने बताया कि गन्ने के बीज शोधन यंत्र से कम समय में अधिक बीज का शोधन किया जा सकता है, और वह भी कम दवाई के उपयोग से। इस तकनीक से गन्ना बीज में होने वाली बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे किसानों को स्वस्थ गन्ना पौध मिल सके।
इसके अतिरिक्त, गन्ना कटाई यंत्र के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इस यंत्र का उपयोग गन्ने की कटाई के बाद बचे हुए गन्ने को शुगर मिल में भेजने या फिर गुड़ बनाने में किया जा सकता है। इससे न केवल किसानों की लागत में कमी आएगी, बल्कि उनके मुनाफे में भी बढ़ोतरी हो सकेगी।
किसानों के लाभ में वृद्धि
इस कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि गन्ना उत्पादन के इन नए उपकरणों का उपयोग किसानों के लिए बहुत लाभकारी साबित होगा। जहां एक ओर गन्ना बीज शोधन यंत्र के इस्तेमाल से कम समय में अधिक कार्य हो सकेगा, वहीं दूसरी ओर गन्ना कटाई यंत्र के इस्तेमाल से मजदूरी की लागत में भी कमी आएगी। यह कदम किसानों को अधिक मुनाफा कमाने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे गन्ना उत्पादन में भी सुधार होगा।
कार्यक्रम में गोरखपुर के एक दर्जन से अधिक किसान भी उपस्थित थे। इस मौके पर गोरखपुर के कृषि विज्ञान केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. अवनीश कुमार सिंह, मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय, मैनेजर आशीष कुमार सिंह, लैब टेक्नीशियन जितेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी अपनी राय दी।
इस तरह के शोध और तकनीकी पहल गोरखपुर के किसानों के लिए एक नई दिशा और अवसर प्रस्तुत करते हैं। गन्ने की खेती में सुधार के लिए किए गए ये प्रयास न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगे, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार लाएंगे। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की यह पहल गन्ना किसानों को एक मजबूत और आधुनिक तकनीकी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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एक अप्रैल को जीवन दिवस के रूप में मनाने का आह्वान: डॉ. गोस्वामी गौरव भारती

गोरखपुर/ राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोस्वामी गौरव भारती के नेतृत्व में 1 अप्रैल को ‘मूर्ख दिवस’ की पुरानी और गलत अवधारणा को बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस दिन को अब ‘जीवन दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। डॉ. गोस्वामी गौरव भारती के आह्वान पर यह कदम उठाया गया है ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इस दिन के सही महत्व का अहसास हो और हम इसे सकारात्मक रूप से मनाएं। इस अवसर पर प्रदेश और जनपद के सभी निजी विद्यालयों में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ ‘जीवन दिवस’ का आयोजन किया जाएगा।

भारत में 1 अप्रैल को नववर्ष का शुभारंभ होता है, जो भारतीय आर्थिक और शैक्षिक सत्र की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन पिछले कई दशकों से इसे ‘मूर्ख दिवस’ के रूप में मनाया जाता रहा है। अब इस दिन को सकारात्मक रूप से मनाने के लिए राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ ने यह संकल्प लिया है। डॉ. गोस्वामी गौरव भारती ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह दिन हमारी स्मृतियों में जीवन के उत्सव के रूप में रहे, न कि मूर्खता के प्रतीक के रूप में।”

कार्यक्रम के तहत जिला अध्यक्ष गणेश प्रसाद शर्मा ने जनपद के प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें इस महत्वपूर्ण आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने जिला अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी और जिला वन अधिकारी से अपील की कि वे भी इस दिन को जीवन दिवस के रूप में मनाने के लिए अपने संबंधित विभागों में कार्यक्रम आयोजित करें और समाज को जागरूक करें।
गणेश शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोस्वामी गौरव भारती के नेतृत्व में इस पहल को और व्यापक बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय के छात्रों को एक पौधा लगाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा, छात्र एक पौधा अपने घर पर भी लगाएंगे, ताकि इस दिन की यादें उनके जीवन में हमेशा बनी रहें।
संघ ने यह भी अपील की है कि समाज के हर वर्ग को इस पहल का हिस्सा बनना चाहिए। उन्हें अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य माध्यमों के जरिए जीवन दिवस के महत्व को फैलाना चाहिए। इस दिन को भारतीय सनातन संस्कृति के नववर्ष के रूप में बड़े उत्साह और मंगलमय तरीके से मनाने की आवश्यकता है।
संघ ने इस ऐतिहासिक पहल को एक वैश्विक आंदोलन बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें हर व्यक्ति और समाज का हर वर्ग शामिल हो। इसका उद्देश्य समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जीवन के महत्व को समझाना है। प्रत्येक व्यक्ति से अपील की गई है कि वे 1 अप्रैल को ‘जीवन दिवस’ के रूप में मनाने के इस अभियान में अपना योगदान दें और अपने घर पर एक पौधा लगाकर इस दिन को यादगार बनाएं।
राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ का यह प्रयास समाज में एक नई दिशा देने के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है। इस आयोजन के जरिए हम 1 अप्रैल को ‘मूर्ख दिवस’ के कलंक को मिटाकर इसे जीवन, पर्यावरण और जागरूकता के प्रतीक के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम के तहत हम सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हम न केवल एक दिन, बल्कि पूरे वर्ष पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करें। जीवन दिवस का आयोजन न केवल पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देगा, बल्कि यह हमारे बच्चों को भी जीवन के महत्व और प्रकृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
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बकरी पालन में सही पोषण और प्रबंधन की आवश्यकता होती हैं-डॉ. विवेक प्रताप सिंह पशुपालन विशेषज्ञ केवीके

गोरखपुर/ बकरी पालन एक लाभकारी व्यवसाय हो सकता है, लेकिन इसके लिए सही पोषण और बकरी प्रबंधन की आवश्यकता होती है। महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. विवेक प्रताप सिंह के अनुसार, बकरियों के पोषण और आहार पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि वे स्वस्थ रहें और अधिक उत्पादक हों। सही आहार देने के लिए एक उचित टाइम टेबल बनाना आवश्यक है।
बकरी के पोषण का महत्व
बकरी पालन में बकरियों को सही आहार देने के लिए समय और प्रकार का ध्यान रखना आवश्यक है। डॉ. विवेक बताते हैं कि बकरियों को अनाज खिलाने के बाद कम से कम 2 घंटे का समय देना चाहिए ताकि वे अपना आहार अच्छे से पचा सकें। बकरियों के लिए आहार के मिश्रण का चयन मौसम के अनुसार करना चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य और उत्पादकता को प्रभावित करता है।
ग्रीष्मकाल और सर्दियों में आहार
गर्मी और सर्दी के मौसम में बकरियों को अलग-अलग आहार दिया जाना चाहिए। ग्रीष्मकाल में बकरियों को ताजे पानी के साथ जौ, मक्का, काला चना और गेहूं का मिश्रण दिया जा सकता है। यह उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है और शरीर को ठंडा बनाए रखता है। वहीं, सर्दियों में बकरियों को काले चने, गेहूं, सोयाबीन और मेथी के बीज का मिश्रण देना चाहिए, जो उन्हें गर्म रखने में मदद करता है और उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखता है।
आहार देने का सही तरीका
बकरियों को आहार देने के बाद तुरंत पानी नहीं देना चाहिए। बकरियों को आहार देने के बाद 2 घंटे का अंतराल रखें, फिर उन्हें पानी दें। उदाहरण के लिए, यदि आपने सुबह 8 बजे बकरियों को अनाज का मिश्रण दिया, तो उन्हें 10 बजे तक खाने का समय दें और फिर 12 बजे पानी दें। यह तरीका बकरियों के पाचन को बेहतर बनाता है और उन्हें ज्यादा फायदा पहुंचाता है।
हरी घास और चारे का महत्व
बकरियों के आहार में हरी घास और हरी पत्तियों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। ये बकरियों को न केवल पोषण प्रदान करते हैं, बल्कि उनका पाचन तंत्र भी सही बनाए रखते हैं। यदि हरी घास उपलब्ध नहीं हो, तो आप गेहूं का भूसा भी तैयार कर सकते हैं। इसे बनाने का तरीका सरल है:
- 1 किलो भूसा लें और उसमें थोड़ा पानी डालकर अच्छे से मिला लें।
- फिर उसमें आधा किलो गेहूं का चोकर (या 250 ग्राम गेहूं का आटा) डालें।
- एक चाय के चम्मच बराबर नमक और जीरा मिलाएं, जो पाचन में सहायक होता है।
इस भूसे को बकरियों को खाने के लिए दें, और साथ में उन्हें पानी भी दें। एक बार जब वे इसे खा लें, तो आप उन्हें अन्य चारा भी दे सकते हैं।
बकरियों के लिए अनाज मिश्रण
शाम के समय बकरियों को फिर से अनाज का मिश्रण दें। इससे उनकी ऊर्जा बनी रहती है और वे स्वस्थ रहती हैं। अनाज का मिश्रण बकरियों की उम्र और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है, इसलिए हर बकरी की जरूरत को समझकर आहार दिया जाना चाहिए।
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